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पत्रकारों की गिरफ्तारी देश व प्रदेश के लिए शर्मनाक:सौरभ कुमार

 


ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर बलिया के पत्रकारों ने दिया पत्रक



(बसन्त पाण्डेय)

बलिया,उत्तर प्रदेश।  इंटरमीडिएट अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक होने के बाद अपनी नाकामी पर पर्दा डालने के लिए जिलाप्रशासन द्वारा बलिया के तीन पत्रकारों अजीत ओझा, दिग्विजय सिंह, मनोज कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर लिए जाने की घटना ने समूचे प्रदेश के पत्रकारों को झकझोर कर रख दिया है। इससे आक्रोशित पत्रकारों ने पूरे प्रदेश में आंदोलन को तेज कर दिया है। इस क्रम में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में पूरे प्रदेश के जिलामुख्यालयों पर 

महामहिम राज्यपाल को सम्बोधित पत्रक सौपने के आह्वान किया है। जिसके तहत बलिया में भी बुधवार को ग्रापए के जिलाध्यक्ष शशिकांत मिश्रा के नेतृत्व में पत्रकारों ने स्थानीय लोक निर्माण विभाग के डाक बंगले से जुलूस निकालकर नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे जहां उनके द्वारा महामहिम राज्यपाल को संबोधित पत्रक(मांग पत्र ) सौंपा। 



वहीं गिरफ्तार निर्दोष पत्रकारों की अविलम्ब रिहायी व जिलाधिकारी सहित दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही को लेकर जमकर नारेबाजी की। मांग पत्र के माध्यम से उन्होंने गिरफ्तार पत्रकारों की अविलम्ब रिहाई करने,प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाये जाने, सभी प्रकार के पत्रकारों को सूचीबद्ध करने,पत्रकारों के किसी प्रकरण में कथित रूप से संलिप्त होने पर भी सीओ स्तर के जांच होने के पूर्व पत्रकारों की गिरफ्तारी न करने आदि मांगो पर अमल करने की मांग की। इस मौके पर ग्रापए के प्रदेश अध्यक्ष सौरभ कुमार ने अपने सम्बोधन में कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है। ऐसे पर्चा लीक का समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकारों को गिरफ्तार करना लोकतंत्र पर हमला है। जिसे हम कत्तई बर्दाश्त नहीं करेंगे। 


कहा कि सच्चाई को छापने वाले पत्रकारों की गिरफ्तारी देश व प्रदेश के लिए काफी शर्मनाक है। सरकार को इसमे हस्तक्षेप कर पत्रकारों की रिहाई के साथ दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करनी चाहिए। अन्यथा सरकार व उसके व्यवस्था पर से पत्रकारों अलावा समूचे जनमानस का भरोसा उठ जायेगा। कहा कि जब जान बुझ कर कुछ दागी,डिबार व कम संसाधनों वाले स्कूलों को परीक्षा केंद्र बनाया गया। तभी यह मान लिया गया था कि जिला प्रशासन नकल को बढ़ावा दे रहा है। किन्तु उसकी भरपाई निर्दोष पत्रकारों की गिरफ्तारी के रूप में होगा यह किसी ने नही सोचा था। जिलाध्यक्ष शशिकांत मिश्रा ने कहा कि पत्रकार मुल्क व समाज की हिफाजत के लिए हमेशा सच्चाई को छापता है। इस प्रशासन को सचेत होना चाहिए।


 यदि संस्कृत के पेपर लीक होने पर प्रशासन गुप्तचर विभाग को लगा कर कार्यवाही कर दिया होता अंग्रेजी का पेपर लीक होता ही नहीं। लेकिन उसने ऐसा नहीं कर उल्टे पत्रकारों को गिरफ्तार करा दिया। कहा कि जबतक पत्रकार साथियों की रिहाई कर मुकदमे वापस नहीं लिए जाते तथा दोषी अधिकारियों को निलंबित नहीं किया जाता तबतक यह आंदोलन चलता रहेगा। 

जुलूस में पत्रकार डाक्टर विनय कुमार सिंह, अरविन्द तिवारी,वीर बहादुर सिंह, राम प्रताप तिवारी, सिंधु जी, कामरेड जनार्दन सिंह, श्याम प्रकाश, तिलक कुमार, शकील अहमद अंसारी,रमाकांत सिंह,तिलक जी बसंत पाण्डेय,आलोक पाण्डेय,कृष्णा शर्मा, सुनील सरदास पूरी,आचार्य सुरेश तिवारी,कैलाश पति सिंह,पंकज सिंह जुगनू, आदि पत्रकार शामिल रहे


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