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बलिदान दिवस,विद्रोही तेवरों की वजह से बलिया को कहा जाता है बागी बलिया:-शेख अहमद अली

 बाईट शेख अहमद अली,(संजय भाई)




बलिया,उत्तर प्रदेश।बलिया बलिदान दिवस भारत की आजादी की लड़ाई का वह महत्त्वपूर्ण हिस्सा है जो इतिहास के पन्नो में हमेशा-हमेशा के लिए स्वर्णाक्षरो में दर्ज रहेगा। 
 बलिया ने आगे बढ़कर पूरे देश को आजाद हिन्दुस्तान का रास्ता दिखाया,ये लड़ाई पूरे जनपद ने एक जुट होकर लड़ी थी, और अंग्रेजों की लाख कोशिशों के बाद भी बलिया वासी एक जुट रहे।तथा अंग्रेजों को यहां से भगाने में कामयाब रहे।

बलिया बलिदान दिवस के अवसर पर एक बार फिर से हमें अपनी कौमी एकता को मजबूत करते हुए इस देश के विकास की गति को और बढाना चाहिए।


जिससे एक सशक्त,समृद्ध भारत निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सके, इसलिए जो नागरिक जितनी सामर्थ्य में है उतना ही प्रयास करें, इस कोरोना काल में यह और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गया है,

हमें अपने जनपद के उन सभी/(क्रांतिकारियों) स्वतन्त्रता सेनानियों, का ऋणी होना चाहिए जिन्होंने गोली लाठी खाकर भी, बलिया जिले के सम्मान को इतिहास में दर्ज करवा गए थे।
मैं सभी सेनानियों (क्रांतिकारियों) को अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं।


1942 में आज के ही दिन उत्तर प्रदेश का यह जिला हुआ था आजाद, अंग्रेजी हुकुमत ने टेके थे घुटने।

19 अगस्त बलिया के लिए गौरवशाली दिन है।1942 में इसी दिन बागी बलिया के सैकड़ों क्रांतिकारियों ने अपनी शहादत देकर ब्रिटिश हुकुमत से लोहा लेते हुए जिला कारागार का दरवाजा खोल जेल मे बन्द अपने क्रांतिकारी साथयों को आजाद कराया था। भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में विद्रोही तेवरों की वजह से बलिया को बागी बलिया भी कहा जाता है ।

डेस्क न्यूज़

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